सरोज – कमल
मुकुर – दर्पण
बरनऊं – वर्णन करूँ
जानिके – जानकर
मोहिं – मुझे
तिहुँ – तीनों
कुमति – बुरी बुद्धि
कंचन – सोना
बरन – रंग
बिराज – शोभित
मूँज – घास की डोरी
जनेऊ – यज्ञोपवीत
सियहिं – सीता जी को
- जरावा – जलाया
- संवारे – पूरा किया
संजीवन – संजीवनी बूटी
हरषि – प्रसन्न होकर
उर – हृदय
लाए – लगाया
कीन्ही – की
बड़ाई – प्रशंसा
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
सनकादिक – सनक आदि ऋषि
ब्रह्मादि – ब्रह्मा आदि देवता
मुनीसा – मुनियों के ईश्वर
नारद – नारद ऋषि
सारद – सरस्वती देवी
सहित – सहित
अहीसा – शेषनाग
कोविद – विद्वान
कहि सके – कह सकते
कहां ते – कहाँ तक
यमराज, कुबेर और दिगपाल भी हनुमान जी की महिमा का वर्णन नहीं कर सकते, तो कवि और विद्वान कैसे कर पाएंगे?
कीन्हा – किया
- दीन्हा – दी
लंकेश्वर – लंका का राजा
भए – बने
लील्यो – निगल लिया - leelyo – swallowed
मेलि – रखकर
अचरज – आश्चर्य
नाही – नहीं
दुर्गम – कठिन
सुगम – सरल
अनुग्रह – कृपा
आज्ञा – अनुमति
बिनु – बिना
पैसारे – प्रवेश
लहै – प्राप्त करते हैं
तेज – शक्ति, तेज
सम्हारो – नियंत्रित करते हैं
आपै – स्वयं
हांकते – पुकारते हैं
- कांपै – कांपते हैं
- लावै – लगाता है
तपस्वी – तप करने वाले
- साजा – पूरे किए
मनोरथ – इच्छा, अभिलाषा
अमित – असीम
परसिद्ध – प्रसिद्ध
- उजियारा – प्रकाश
- उजियारा – प्रकाश
रखवारे – रक्षक
निकंदन – नाश करने वाले
- दुलारे – प्रिय
सिद्धि – सिद्धियाँ (अलौकिक शक्तियाँ)
निधि – धन-सम्पदा
अस – ऐसा
बर – वरदान
दीन – दिया
रसायन – अमृत, औषधि
पावै – प्राप्त करता है
- बिसरावै – भूल जाता है, समाप्त हो जाते हैं
गुरुदेव – गुरु
की नाईं – की तरह
चेरा – सेवक
- कीजै – कीजिए
- नाथ – प्रभु
- हृदय – हृदय
- महँ – में
• • डेरा – निवास
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