Monday, December 15, 2025

hanumanchalisha words

 सरोज – कमल

मुकुर – दर्पण


बरनऊं – वर्णन करूँ


जानिके – जानकर


मोहिं – मुझे


तिहुँ – तीनों


कुमति – बुरी बुद्धि


कंचन – सोना


बरन – रंग


बिराज – शोभित


मूँज – घास की डोरी


जनेऊ – यज्ञोपवीत


सियहिं – सीता जी को


  • जरावा – जलाया


  • संवारे – पूरा किया


संजीवन – संजीवनी बूटी


हरषि – प्रसन्न होकर

उर – हृदय

लाए – लगाया

कीन्ही – की


बड़ाई – प्रशंसा


सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।

सनकादिक – सनक आदि ऋषि


ब्रह्मादि – ब्रह्मा आदि देवता


मुनीसा – मुनियों के ईश्वर


नारद – नारद ऋषि

सारद – सरस्वती देवी

सहित – सहित

अहीसा – शेषनाग


कोविद – विद्वान

कहि सके – कह सकते

कहां ते – कहाँ तक


यमराज, कुबेर और दिगपाल भी हनुमान जी की महिमा का वर्णन नहीं कर सकते, तो कवि और विद्वान कैसे कर पाएंगे?


कीन्हा – किया


  • दीन्हा – दी


लंकेश्वर – लंका का राजा

भए – बने

लील्यो – निगल लिया - leelyo – swallowed

मेलि – रखकर



अचरज – आश्चर्य

नाही – नहीं


दुर्गम – कठिन

सुगम – सरल


अनुग्रह – कृपा


आज्ञा – अनुमति

बिनु – बिना

पैसारे – प्रवेश


लहै – प्राप्त करते हैं


तेज – शक्ति, तेज

सम्हारो – नियंत्रित करते हैं

आपै – स्वयं


हांकते – पुकारते हैं


  • कांपै – कांपते हैं


  • लावै – लगाता है


तपस्वी – तप करने वाले


  • साजा – पूरे किए


मनोरथ – इच्छा, अभिलाषा


अमित – असीम


परसिद्ध – प्रसिद्ध


  • उजियारा – प्रकाश


  • उजियारा – प्रकाश


रखवारे – रक्षक


निकंदन – नाश करने वाले


  • दुलारे – प्रिय


सिद्धि – सिद्धियाँ (अलौकिक शक्तियाँ)


निधि – धन-सम्पदा


अस – ऐसा

बर – वरदान

दीन – दिया

रसायन – अमृत, औषधि


पावै – प्राप्त करता है


  • बिसरावै – भूल जाता है, समाप्त हो जाते हैं


गुरुदेव – गुरु

की नाईं – की तरह



चेरा – सेवक


  • कीजै – कीजिए
  • नाथप्रभु
  • हृदयहृदय
  • महँमें

डेरानिवास

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